8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन के साथ ही देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की उम्मीदें परवान चढ़ने लगी हैं। इसी कड़ी में प्रमुख ट्रेड यूनियन ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) ने आयोग की अध्यक्ष जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को एक विस्तृत मांग पत्र सौंपा है। इस पत्र में सैलरी, पेंशन और भत्तों में क्रांतिकारी बदलाव के 12 अहम प्रस्ताव रखे गए हैं, जो यदि स्वीकार होते हैं, तो कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति में बड़ा उछाल आएगा।
फिटमेंट फैक्टर और सैलरी में भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव
यूनियन की सबसे प्रमुख मांग फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर 3.0 करने की है। वर्तमान में 7वें वेतन आयोग के तहत यह कम है, जिसे 3 गुना करने से कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और पेंशन में सीधा इजाफा होगा। इसके अलावा, यूनियन ने सैलरी कैलकुलेशन के फॉर्मूले को बदलने का सुझाव दिया है। अब तक सैलरी 3 यूनिट (पति, पत्नी और दो बच्चे) के आधार पर तय होती थी, जिसे बढ़ाकर 5 यूनिट (माता-पिता को शामिल करते हुए) करने की मांग की गई है।
सालाना इंक्रीमेंट और प्रमोशन पर जोर
कर्मचारियों के करियर ग्रोथ को ध्यान में रखते हुए AITUC ने दो बड़े बदलाव सुझाए हैं
सालाना इंक्रीमेंट: वर्तमान 3% की वार्षिक वेतन वृद्धि को बढ़ाकर 6% करने की मांग की गई है।
प्रमोशन गारंटी: यूनियन का कहना है कि 30 साल की सेवा के दौरान कर्मचारियों को कम से कम 5 प्रमोशन मिलने चाहिए, ताकि करियर में ठहराव न आए।
पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली पर अड़ी यूनियन
पेंशन के मुद्दे पर ट्रेड यूनियन ने कड़ा रुख अपनाया है। पत्र में NPS और हाल ही में घोषित UPS को खत्म कर पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने की वकालत की गई है। साथ ही, पेंशनभोगियों के लिए हर 5 साल में पेंशन में 5% की अतिरिक्त बढ़ोतरी और पेंशन कम्यूटेशन की बहाली अवधि को 15 साल से घटाकर 11-12 साल करने का प्रस्ताव दिया गया है।
छुट्टियां और भत्तों में नए बदलाव
AITUC ने सामाजिक और स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर भी कई मांगें रखी हैं
लीव एन्कैशमेंट: रिटायरमेंट पर छुट्टियों के नकद भुगतान की सीमा 300 दिन से बढ़ाकर 450 दिन की जाए।
मेडिकल सुविधा: पूरी तरह कैशलेस मेडिकल ट्रीटमेंट की सुविधा मिले
विशेष अवकाश: महिलाओं के लिए ‘मेंस्ट्रुअल लीव’ (मासिक धर्म अवकाश) और पुरुषों के लिए ‘पेटरनिटी लीव’ का प्रावधान हो।
DA और रिस्क अलाउंस: महंगाई भत्ते (DA) के कैलकुलेशन फॉर्मूले में बदलाव और जोखिम भरे कार्यों के लिए रिस्क अलाउंस बढ़ाने की मांग की गई है।

