डेली देवभूमि, देहरादून : देश की राजधानी दिल्ली और उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के बीच की दूरी अब सिमट गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज एक भव्य समारोह में 210 किलोमीटर लंबे दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर (एक्सप्रेसवे) का उद्घाटन कर इसे राष्ट्र को समर्पित किया। इस अवसर पर पीएम मोदी ने कहा कि यह एक्सप्रेसवे केवल ईंट और कंक्रीट का ढांचा नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के विकास को नई ऊंचाई देने वाला महामार्ग है।

इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना और पर्यावरण का संगम
इस एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी विशेषता इसका पर्यावरण-अनुकूल डिजाइन है। परियोजना में पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने के लिए विशेष ध्यान दिया गया है:
एशिया का सबसे बड़ा वाइल्डलाइफ एलिवेटेड कॉरिडोर: राजाजी नेशनल पार्क के पास करीब 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड फ्लाईओवर बनाया गया है, ताकि नीचे से वन्यजीव निर्बाध रूप से आवाजाही कर सकें।
दूरी में बड़ी कटौती: एक्सप्रेसवे शुरू होने से दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय 6-7 घंटे से घटकर मात्र 2.5 घंटे रह जाएगा।
सुरक्षित सफर: इसमें डेटा केंद्रों और सेंसरों के माध्यम से रियल-टाइम ट्रैफिक मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई
आर्थिक और पर्यटन विकास को मिलेगी गति
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में जोर दिया कि इस एक्सप्रेसवे से न केवल तीर्थयात्रियों को सुविधा होगी, बल्कि व्यापार और पर्य टन के नए द्वार खुलेंगे।
”यह एक्सप्रेसवे विकास और पर्यावरण संरक्षण के संतुलन का एक शानदार उदाहरण है। इससे ‘होमस्टे’ और स्थानीय उत्पादों को बड़ा बाजार मिलेगा।”
— नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री
परियोजना की मुख्य विशेषताएं: एक नजर मे
सफर के समय में भारी बचत: इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से दिल्ली और देहरादून के बीच की यात्रा का समय 6-7 घंटे से घटकर मात्र 2.5 घंटे रह जाएगा।
लंबाई और विस्तार: 210 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर दिल्ली के अक्षरधाम से शुरू होकर बागपत, शामली, सहारनपुर होते हुए देहरादून तक पहुंचता है।
एशिया का सबसे लंबा वन्यजीव गलियारा: राजाजी नेशनल पार्क में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया गया है, जो अपनी तरह का एशिया का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है।
डाटकाली सुरंग: यात्रा को सुगम बनाने के लिए इस मार्ग पर 340 मीटर लंबी आधुनिक सुरंग का निर्माण किया गया है।
पर्यावरण का संरक्षण: पूरे मार्ग पर वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) और 500 से अधिक जल पुनर्भरण बिंदुओं की व्यवस्था की गई है।
आर्थिक गलियारा: यह एक्सप्रेसवे न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगा, बल्कि दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून के बीच औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को भी नई गति प्रदान करेगा।
