डेली देवभूमि , चमोली : उत्तराखंड के पर्वतीय जिले चमोली के पोखरी विकासखंड में भालू का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। जूनियर हाईस्कूल हरिशंकर में पिछले तीन दिनों में भालू ने छात्रों पर दो बार हमला किया है, जिससे क्षेत्र में दहशत का माहौल है। स्कूल में मात्र 12 छात्र पढ़ते हैं और जंगल से सटा होने के कारण खतरा बढ़ गया है।
स्कूल परिसर में भालू का हमला: बच्चे को गोद में उठाकर ले गया
सोमवार (22 दिसंबर) सुबह की घटना में दो भालू स्कूल परिसर में घुस आए। कक्षा 6 के छात्र आरव पुंडीर पर एक भालू ने हमला कर उसे पंजों से पकड़कर गोद में उठाया और जंगल की ओर ले जाने लगा। भालू ने क्लासरूम के दरवाजे तोड़ने की कोशिश भी की। अन्य छात्र और शिक्षक सहम गए, लेकिन कक्षा 8 की छात्रा दिव्या चौधरी सहित कुछ बच्चों और शिक्षकों ने बहादुरी दिखाई। उन्होंने शोर मचाया, पीछा किया और भालू को मजबूर कर दिया कि वह आरव को झाड़ियों में छोड़कर भाग जाए।
आरव को छाती, पीठ और शरीर पर नाखूनों के गंभीर निशान आए हैं। उसे तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पोखरी में उपचार दिया गया। शिक्षक उपेंद्र सती ने बताया कि भालू के डर से स्कूल का समय 10 बजे कर दिया गया था, लेकिन बच्चे जल्दी आ गए थे।

दो दिन पहले: स्कूल जाते समय हमला, दोस्त ने बचाई जान
इससे मात्र दो दिन पहले, 20 दिसंबर को इसी स्कूल के कक्षा 7 के छात्र देवेश और कक्षा 6 के पंकेश स्कूल जा रहे थे। स्कूल से करीब 150 मीटर दूर झाड़ियों से भालू का बच्चा निकला और देवेश के पैर पर हमला कर दिया। पंकेश ने हिम्मत दिखाते हुए पत्थर मारकर और शोर मचाकर भालू को भगाया। देवेश को पैर में हल्की चोटें आईं, जिनका उपचार करअन्य घर भेज दिया गया। पंकेश की बहादुरी की हर तरफ तारीफ हो रही है।

अन्य घटनाएं: स्कूल लौटते बच्चों पर भी हमला
क्षेत्र में भालू का आतंक इससे पहले भी जारी है। हाल ही में हरिशंकर गनियाला गांव के स्कूल से लौट रहे छात्र-छात्राओं पर भालू ने हमला किया, जिससे बच्चे डरकर बस्ता छोड़कर भागे। ग्रामीणों ने शोर मचाकर भालू को भगाया, लेकिन कोई गंभीर चोट नहीं आई।

प्रशासन की कार्रवाई
वन विभाग ने क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है, पिंजरे लगाए हैं और टीम तैनात की हैं। रुद्रप्रयाग जिले में भी भालू के आतंक से स्कूलों का समय बदल दिया गया है – अब सुबह 9:30 बजे से पहले स्कूल नहीं खुलते और दोपहर 3 बजे तक छुट्टी होती है। चमोली में भी बच्चों को झुंड में चलने और शोर मचाने की सलाह दी जा रही है। 2025 में उत्तराखंड में भालू के हमले बढ़े हैं, मुख्य कारण जलवायु परिवर्तन से हाइबरनेशन प्रभावित होना बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की यह स्थिति गंभीर है और लंबे समय के उपाय जरूरी हैं।
