देवभूमि डेली, जोशीमठ :उत्तराखंड के संवेदनशील नंदा देवी बायोस्फियर रिजर्व में लगी भीषण वनाग्नि को बुझाने के लिए भारतीय वायुसेना ने मोर्चा संभाल लिया है। अपनी ‘Operational Readiness’ (परिचालन तत्परता) का लोहा मनवाते हुए वायुसेना ने दुर्गम पहाड़ियों के बीच एक बेहद जटिल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

संकट में विश्व धरोहर
नंदा देवी का इलाका अपनी जैव विविधता के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। आग लगने के कारण यहाँ के दुर्लभ वन्यजीवों और बेशकीमती जड़ी-बूटियों पर खतरा मंडरा रहा था। दुर्गम इलाका होने के कारण फायर ब्रिगेड की टीम का वहां पहुंचना मुमकिन नहीं था, जिसके बाद राज्य सरकार ने तुरंत सेना से मदद की गुहार लगाई।
ऐसे चला ‘फायर फाइटिंग’ ऑपरेशन
त्वरित तैनाती: सेंट्रल एयर कमांड का MI-17 V5 हेलिकॉप्टर सूचना मिलते ही फायर फाइटिंग मोड में जोशीमठ पहुंच गया।बकेटिंग तकनीक: हेलिकॉप्टर के जरिए पास की झील/नदी से पानी उठाकर सीधे आग की लपटों पर गिराया गया।सटीक निशाना: पायलटों ने घने धुएं और तेज हवाओं के बीच हेलिकॉप्टर को संतुलित रखते हुए आग के ‘हॉट-स्पॉट्स’ को निशाना बनाया
नागरिक प्रशासन और सेना का अद्भुत ताल मे
वायुसेना के मीडिया कोऑर्डिनेशन सेंटर ने इस पूरे ऑपरेशन के दौरान राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के साथ मिलकर काम किया। समय रहते हुई इस कार्रवाई ने आग को रिजर्व फॉरेस्ट के कोर एरिया (Core Area) में घुसने से रोक दिया, जिससे एक बड़ी प्राकृतिक त्रासदी टल गई।
मुख्य बिंदु:
असर: वन्यजीवों और पर्यावरण के बड़े नुकसान को रोका गया।
संदेश: आपदा प्रबंधन में भारतीय वायुसेना की भूमिका फिर से सिद्ध हुई।
स्थिति: वर्तमान में आग पर प्रभावी नियंत्रण पा लिया गया है।
