डेली देवभूमि देहरादून: उत्तराखंड के किसानों की आर्थिकी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए सरकार ने ‘सगन्ध खेती’ (Aromatic Farming) को मुख्य हथियार बनाने का निर्णय लिया है। मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने गुरुवार को सेलाकुई स्थित सगन्ध पौधा केन्द्र (CAP) का विस्तृत भ्रमण किया और अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस सेक्टर को केवल खेती तक सीमित न रखकर इसे ‘हाई वैल्यू बिजनेस मॉडल’ में बदला जाए।
किसानों के द्वार पर पहुंचेगी मदद
मुख्य सचिव ने एक महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए कहा कि अब किसानों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं होगी। उन्होंने ‘डोर स्टेप सहायता’ प्रणाली लागू करने पर जोर दिया, ताकि विशेषज्ञों की टीम सीधे खेतों तक पहुंचकर तकनीकी मार्गदर्शन दे सके।
6 नए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और स्किलिंग पर जोर
प्रदेश में सुगंधित उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए 6 सैटेलाइट सेंटर्स को जल्द सक्रिय करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही, युवाओं को इस उभरते क्षेत्र में करियर बनाने के लिए डिप्लोमा और सर्टिफिकेशन कोर्स भी शुरू किए जाएंगे, जिससे परफ्यूमरी सेक्टर में नए रोजगार पैदा होंगे।
सब्सिडी और सुविधाओं की बौछार
सगन्ध पौधा केन्द्र के निदेशक डॉ. निर्पेंद्र चौहान ने बताया कि केंद्र छोटे किसानों और उद्यमियों को बड़ा संबल दे रहा हैपर्वतीय जिलों को विशेष प्रोत्साहन: डिस्टिलेशन यूनिट और ड्रायर लगाने पर पहाड़ों में 75% तक की भारी सब्सिडी दी जा रही है।फ्री बीज/पौधे: 5 नाली तक की खेती करने वाले किसानों को मुफ्त रोपण सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
कीमतों की सुरक्षा: किसानों को नुकसान से बचाने के लिए 27 उत्पादों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय किया गया है।
जनवरी तक तैयार होगा ‘रोडमैप 2026-27’
मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना इसी माह (जनवरी) के अंत तक पूरी कर ली जाए। उन्होंने जिलाधिकारियों और वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे नियमित रूप से फील्ड का दौरा करें और जमीनी फीडबैक लें। इस मामले में मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन का कहना हैं कि हाई वैल्यू फसलों का उत्पादन और उनका प्रसंस्करण ही उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में आर्थिक क्रांति ला सकता है। हमारा लक्ष्य हर जिले की जलवायु के हिसाब से फसल चुनना और किसानों को सीधे बाजार से जोड़ना है।
